Music Industry में IPRS का महत्व: कलाकारों और गीतकारों के लिए क्यों जरूरी है IPRS

Oct 02, 2026

भारतीय Music Industry में किसी गाने की सफलता केवल उसके रिलीज होने और लाखों व्यूज मिलने तक सीमित नहीं है। किसी गीत के पीछे गीतकार, संगीतकार और म्यूजिक पब्लिशर जैसे कई रचनाकारों का योगदान होता है। इन रचनाकारों के अधिकारों और उनके संगीत से होने वाली रॉयल्टी को व्यवस्थित तरीके से संभालने में Indian Performing Right Society Limited (IPRS) की महत्वपूर्ण भूमिका है।

IPRS क्या है?

IPRS यानी Indian Performing Right Society Limited भारत में संगीत से जुड़े कॉपीराइट अधिकारों के सामूहिक प्रबंधन के लिए काम करने वाली Copyright Society है। यह केंद्र सरकार द्वारा Copyright Act, 1957 के तहत पंजीकृत है और मुख्य रूप से Authors/Lyricists, Composers और Music Publishers के अधिकारों से संबंधित है। IPRS की स्थापना 1969 में हुई थी। (IPRS -)

सरल शब्दों में समझें तो IPRS संगीत बनाने वाले लोगों और संगीत का व्यावसायिक इस्तेमाल करने वाले Music Users के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी की तरह काम करता है। यह अपने सदस्यों की ओर से लाइसेंसिंग और रॉयल्टी कलेक्शन की व्यवस्था करता है। (IPRS -)

IPRS Music Industry में क्या करता है?

जब किसी गीत का इस्तेमाल सार्वजनिक प्रदर्शन, प्रसारण या अन्य संबंधित उपयोगों में होता है, तो उस उपयोग से संबंधित अधिकारों के लिए लाइसेंस और रॉयल्टी का प्रश्न आता है। IPRS अपने सदस्यों के अधिकारों का प्रबंधन करते हुए संबंधित Music Users से रॉयल्टी एकत्र करता है और निर्धारित नियमों के अनुसार उसे सदस्यों तक वितरित करता है। (IPRS -)

इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि किसी एक कलाकार या गीतकार के लिए अलग-अलग जगहों पर अपने संगीत के उपयोग को ट्रैक करना और हर उपयोगकर्ता से रॉयल्टी प्राप्त करना व्यावहारिक रूप से कठिन हो सकता है।

भोजपुरी कलाकारों के लिए IPRS क्यों महत्वपूर्ण है?

भोजपुरी Music Industry में बड़ी संख्या में स्वतंत्र गायक, गीतकार, संगीतकार और म्यूजिक प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ भोजपुरी संगीत का उपयोग और प्रसार भी अलग-अलग माध्यमों पर हो रहा है।

ऐसे में गीतकार और संगीतकार अपने मूल रचनात्मक अधिकारों को समझें और अपने कार्यों का सही रिकॉर्ड एवं मेटाडेटा बनाए रखें, यह बहुत महत्वपूर्ण है। IPRS के अनुसार उसके सदस्यों को अपनी रचनाओं की सही जानकारी और Work Notifications जमा करनी होती हैं, ताकि Royalty Distribution में सही जानकारी का उपयोग किया जा सके। (IPRS -)

एक जरूरी अंतर: Sound Recording और Musical Work

Music Industry में एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। किसी गाने में Sound Recording और उसके पीछे मौजूद Musical/Literary Work, यानी धुन और गीत, अलग-अलग अधिकार हो सकते हैं।

IPRS मुख्य रूप से Musical Works और उनसे जुड़े Literary Works यानी lyrics के अधिकारों का प्रशासन करता है। Sound Recording के अधिकार अलग अधिकारधारक या संबंधित संस्थाओं के अंतर्गत हो सकते हैं। इसलिए किसी गाने के व्यावसायिक उपयोग में केवल एक प्रकार के अधिकार को समझना पर्याप्त नहीं होता। (IPRS -)

Digital Music के दौर में बढ़ता महत्व

YouTube, Spotify, Apple Music, Amazon Music और अन्य डिजिटल माध्यमों ने Music Publishing और Copyright Management को और महत्वपूर्ण बना दिया है। IPRS की जानकारी के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार ने Music Publishing के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। (IPRS -)

इसलिए आज के कलाकारों के लिए केवल गाना रिलीज करना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें Copyright, Publishing, Metadata, Royalty और Digital Distribution को भी समझना चाहिए।

निष्कर्ष

IPRS Music Industry के उस हिस्से को मजबूत करने में मदद करता है जहां रचनाकार के अधिकार और उसकी रॉयल्टी महत्वपूर्ण होते हैं। खासकर गीतकारों, संगीतकारों और Music Publishers के लिए अपने अधिकारों को समझना, सही जानकारी दर्ज रखना और उचित Copyright Management व्यवस्था का उपयोग करना महत्वपूर्ण है।

भोजपुरी सहित भारतीय Music Industry के लिए मजबूत Copyright और Royalty Ecosystem कलाकारों को अपने रचनात्मक काम से मिलने वाले आर्थिक अधिकारों को व्यवस्थित करने में मदद कर सकता है।

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